चाणक्य नीति: ऐसे समय में पिएंगे पानी तो पानी हो जाता है विष समान

महान दूरदर्शी विद्वान आचार्य चाणक्य ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना करके अखण्ड भारत का निर्माण किया था। भारत के इतिहास में आचार्य चाणक्य का महत्वपूर्ण स्थान है। अपनी नीतियों के दम पर उन्होंने भारत की कई बार कठिन परिस्थतियों में रक्षा की। आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी व्यक्ति के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती हैं। जो भी व्यक्ति नीतियों का पालन करता है, उसे जीवन में सभी सुख-सुविधाएं और कार्यों में सफलता अवश्य प्राप्त होती है। आईए जानें आचार्य की उन्हीं नीतियों में से एक के बारें में जिसमें उन्होंने बताया है कि व्यक्ति को किन परिस्थितियों में पानी नहीं पीना चाहिए। 

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि-
अजीर्णे भेषजं वारि जीर्णे वारि बलप्रदम्।
भोजने चाऽमृतं वारि भोजनान्ते विषप्रदम्।।

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य बताते हैं कि भोजन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। खाना खाने के बाद जब तक खाना पच न जाए, तब तक पानी पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। यदि कोई व्यक्ति भोजन के तुरंत बाद ज्यादा पानी पी लेता है तो उसके पाचन तंत्र को भोजन पचाने में काफी परेशानियां होती हैं। यदि खाना ठीक से पचेगा नहीं तो शरीर को उचित ऊर्जा प्राप्त नहीं हो सकेगी। अपच की स्थिति में पेट संबंधी रोग होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। भोजन के तुरंत बाद पानी पीने पर वह विष के समान कार्य करता है यानी भोजन के तुरंत पिया पानी फायदा नहीं नुकसान पहुंचाता है। भोजन के बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा पानी पी सकते हैं, लेकिन अधिक पानी पीना नुकसानदायक हो सकता है।
चाणक्य नीति: ऐसे समय में पिएंगे पानी तो पानी हो जाता है विष समान चाणक्य नीति: ऐसे समय में पिएंगे पानी तो पानी हो जाता है विष समान Reviewed by Author on February 04, 2020 Rating: 5
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